पहचान पत्र होने के बावजूद मतदान से रोका गया
बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण की वोटिंग के दौरान पटना के एक मतदान केंद्र पर महिलाओं ने गंभीर आरोप लगाए हैं कि उन्हें वोट डालने की अनुमति नहीं दी गई। महिलाओं का कहना है कि उनके पास वैध पहचान पत्र मौजूद था, फिर भी उन्हें मतदान केंद्र में प्रवेश नहीं दिया गया। इस घटना ने मतदान केंद्र पर अफरा-तफरी का माहौल पैदा कर दिया। कई महिलाओं ने नाराज़ होकर बाहर ही विरोध जताया और अधिकारियों से सवाल किए। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह लोकतांत्रिक अधिकारों का उल्लंघन है।
महिलाओं ने जताई नाराज़गी और की शिकायत
मतदान केंद्र पर मौजूद कई महिलाओं ने बताया कि जब वे वोट डालने पहुंचीं, तो उन्हें रोक दिया गया। अधिकारियों ने यह कहते हुए रोक लगाई कि उनके नाम मतदाता सूची में नहीं हैं। महिलाओं ने बताया कि उन्होंने पहले ही अपने नाम की पुष्टि कर ली थी। इसके बावजूद उन्हें मतदान करने से रोका गया, जिससे वे आक्रोशित हो गईं। उन्होंने मौके पर ही अपनी शिकायत दर्ज करवाई और न्याय की मांग की।
अधिकारियों ने दिया स्पष्टीकरण
चुनाव अधिकारियों ने मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कुछ तकनीकी दिक्कतें सामने आई हैं। उनका कहना है कि मतदाता सूची में कुछ नाम गलती से हट गए या प्रदर्शित नहीं हो पाए। अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि सभी शिकायतों की जांच की जाएगी। उन्होंने कहा कि यदि गलती पाई गई, तो आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। चुनाव आयोग ने मतदाताओं से शांति बनाए रखने की अपील भी की है।
स्थानीय लोगों ने की निष्पक्ष चुनाव की मांग
घटना के बाद स्थानीय लोगों में आक्रोश और चिंता दोनों देखने को मिली। लोगों ने प्रशासन से मांग की कि इस तरह की गड़बड़ियों को तुरंत सुधारा जाए। उनका कहना है कि हर नागरिक को मतदान का समान अवसर मिलना चाहिए। स्थानीय संगठनों ने भी निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव की मांग की है। लोगों का कहना है कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए ऐसी घटनाएँ नहीं दोहराई जानी चाहिए।













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