कैंपस से सड़कों तक क्यों गूंज रहा है विरोध?
यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (UGC) के नए नियम Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026 आते ही देशभर के विश्वविद्यालयों में हलचल मच गई है | जातिगत भेदभाव रोकने के नाम पर लाए गए इन नियमों को लेकर छात्र दो धड़ों में बंट गए हैं | एक तरफ दलित, आदिवासी और पिछड़े वर्ग के छात्र इसे अपनी सुरक्षा के लिए जरूरी बता रहे हैं, तो दूसरी तरफ जनरल कैटेगरी के छात्र इसे एकतरफा और भेदभावपूर्ण करार दे रहे हैं | कैंपस के भीतर ही नहीं, सड़कों पर भी इसका विरोध देखने को मिल रहा है |
आखिर क्या है UGC का नया इक्विटी नियम?
नए नियमों के तहत हर यूनिवर्सिटी और कॉलेज में एक इक्विटी कमेटी बनाना अनिवार्य होगा | इस कमेटी में SC, ST, OBC, महिलाएं और दिव्यांग प्रतिनिधि शामिल होंगे | कमेटी का काम होगा जातिगत भेदभाव की शिकायतें सुनना, तय समय में उनका निपटारा करना और कैंपस में बराबरी का माहौल बनाना | नियमों में साफ कहा गया है कि किसी भी तरह का अपमानजनक, प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष व्यवहार भेदभाव माना जाएगा और दोषी पर सख्त कार्रवाई होगी |
सुप्रीम कोर्ट और दर्दनाक घटनाओं से जुड़ा है मामला
ये नियम यूं ही नहीं लाए गए | सुप्रीम कोर्ट ने 2025 में रोहित वेमुला और पायल तड़वी जैसे मामलों की सुनवाई के दौरान UGC को पुराने 2012 के नियम अपडेट करने का आदेश दिया था | इन दोनों छात्रों ने कथित जातिगत उत्पीड़न के बाद आत्महत्या कर ली थी | उनकी माताओं की ओर से दाखिल जनहित याचिकाओं ने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए, जिसके बाद कोर्ट ने 8 हफ्तों में सख्त नियम बनाने को कहा |
रिपोर्ट ने खोली भेदभाव की सच्चाई
UGC की अपनी रिपोर्ट के आंकड़े भी चौंकाने वाले हैं | 2017-18 में जहां जातिगत भेदभाव की 173 शिकायतें थीं, वहीं 2023-24 में ये बढ़कर 378 हो गईं — यानी करीब 118% की बढ़ोतरी | हालांकि 90% से ज्यादा मामलों का निपटारा हुआ, लेकिन पेंडिंग केस भी 18 से बढ़कर 108 हो गए | इन्हीं आंकड़ों को आधार बनाकर UGC ने इक्विटी कमेटी को अनिवार्य किया |
बराबरी बनाम डर—क्यों फंसा है मामला?
विवाद की असली जड़ यही है | जनरल कैटेगरी के छात्रों का कहना है कि नए नियमों में उनके साथ होने वाले भेदभाव का कोई जिक्र नहीं है और झूठी शिकायतों के जरिए उन्हें फंसाया जा सकता है | इसी वजह से सुप्रीम कोर्ट में इस नियम के खिलाफ याचिका भी दाखिल हो चुकी है | कुल मिलाकर UGC का नया बिल एक तरफ सामाजिक न्याय और सुरक्षा की बात करता है, तो दूसरी तरफ उसके दुरुपयोग का डर भी पैदा करता है | अब सबकी नजरें सुप्रीम कोर्ट पर टिकी हैं कि इस टकराव का संतुलित समाधान क्या निकलता है |













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