आगरा: आगरा के पूर्व ARTO ललित कुमार के घर छापा। उत्तर प्रदेश के आगरा में पूर्व सहायक क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी (ARTO) ललित कुमार के ठिकानों पर विजिलेंस की छापेमारी में ऐसे खुलासे हुए, जिन्होंने पूरे परिवहन विभाग को सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया। जांच के दौरान बेड, फर्नीचर और यहां तक कि दीवारों के अंदर से भी करोड़ों रुपये की नकदी, सोना और चांदी बरामद होने का दावा किया गया। यही वजह है कि यह मामला अब पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बना हुआ है। रिटायर्ड ARTO ललित कुमार के पास अब तक 35 करोड़ रुपए की संपत्ति का पता चला है। विजिलेंस टीम को उसके घर में तिजोरियों में सोना-चांदी-हीरा रखा हुआ मिला है। ये कार्रवाई एक दिन की जांच का नतीजा नहीं है। इसकी शुरुआत 6 साल पहले कानपुर में उनकी तैनाती के दौरान हुई शिकायत से हुई थी।
आखिर क्यों हुई ललित कुमार के घर छापेमारी?
दरअसल, विजिलेंस विभाग को लंबे समय से पूर्व ARTO ललित कुमार के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने की शिकायतें मिल रही थीं।इसके बाद जांच एजेंसियों ने सबूत जुटाए और कोर्ट से अनुमति मिलने के बाद उनके कई ठिकानों पर एक साथ कार्रवाई शुरू की।
तलाशी के दौरान एक के बाद एक हुए चौंकाने वाले खुलासे
शुरुआत में जांच टीम ने घर के कमरों, अलमारियों और लॉकरों की तलाशी ली। हालांकि, जब अधिकारियों को कुछ जगहों पर संदेह हुआ तो उन्होंने फर्नीचर और दीवारों की भी जांच शुरू कर दी।
सबसे पहले बेड के अंदर से भारी मात्रा में नकदी मिली। इसके बाद सोफे और अन्य फर्नीचर की तलाशी ली गई। इतना ही नहीं, जब दीवारों को तोड़ा गया तो उनके भीतर से सोने के बिस्कुट और आभूषण बरामद हुए। इन बरामदगियों ने जांच टीम को भी हैरान कर दिया।

छापेमारी में क्या-क्या बरामद हुआ?
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अब तक की कार्रवाई में कई चीजे बरामद हुई हैं जैसे
करीब 1.62 करोड़ रुपये नकद, लगभग 13 किलोग्राम सोना ,करीब 9 किलोग्राम चांदी , कई बैंक दस्तावेज और निवेश से जुड़े रिकॉर्ड ,संपत्तियों से संबंधित महत्वपूर्ण कागजात। फिलहाल बरामद सोने, चांदी और नकदी का मूल्यांकन किया जा रहा है।
ऑटोमैटिक लॉक वाली तिजोरी ने बधाई विजिलेंस की मुश्किलें
छापेमारी के दौरान विजिलेंस टीम के सामने अबसे बड़ी चुनौती घर में राखी ऑटोमैटिक तिजोरी को खोलना था। अधिकारियों ने कई बार ललित कुमार से उसका पासवर्ड पूछा लेकिन उन्होंने हर आर पासवर्ड याद नहीं है यह बात बोलकर उसको टालते गए। इसके चलते तलाशी की बात से अभियान 2 घंटे तक प्रभावित जुई आखिरकार तकनिकी टीम की मदद से आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के बाद तिजोरी खोली गयी। इसके बाद जाँच प्रक्रिया आगे बढ़ी।
पूरे RTO सिस्टम पर क्यों उठ रहे हैं सवाल?
इस कार्रवाई के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर एक सरकारी अधिकारी के पास इतनी बड़ी मात्रा में संपत्ति कैसे पहुंची? दूसरी ओर यह भी चर्चा है कि क्या यह सिर्फ एक व्यक्ति का मामला है या फिर पूरे सिस्टम में कहीं न कहीं भ्रष्टाचार की जड़ें गहरी हैं।
यही कारण है कि सोशल मीडिया पर लोग RTO विभाग की कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर लगातार सवाल उठा रहे हैं।
जांच एजेंसियों की आगे क्या है तैयारी?
अब विजिलेंस टीम बरामद दस्तावेजों की गहन जांच कर रही है। बैंक खातों, जमीनों, निवेश और अन्य संपत्तियों का पूरा ब्यौरा खंगाला जा रहा है। यदि जांच में आय से अधिक संपत्ति के आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत सख्त कार्रवाई की जा सकती है।
इस कार्रवाई का क्या पड़ेगा असर?
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की कार्रवाई भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार के सख्त रुख को दर्शाती है। वहीं यदि जांच में और नाम सामने आते हैं, तो यह मामला परिवहन विभाग के लिए और भी बड़ा बन सकता है।
आगरा के पूर्व ARTO ललित कुमार के ठिकानों पर हुई विजिलेंस की छापेमारी ने एक बार फिर सरकारी विभागों में पारदर्शिता और जवाबदेही पर बहस छेड़ दी है। बेड से करोड़ों का कैश और दीवारों से सोना मिलने के दावों ने इस मामले को राष्ट्रीय स्तर की सुर्खियों में ला दिया है। अब सभी की नजर जांच की अगली कार्रवाई और उससे होने वाले नए खुलासों पर टिकी हुई है।













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