बिहार: बांकीपुर में BJP की बैक-टू-बैक दो मुश्किलें! पहले टिकट बदला, अब नए उम्मीदवार नीरज कुमार सिन्हा के बायोडाटा पर मचा बवाल। बिहार के हाई प्रोफाइल बांकीपुर विधानसभा सीट पर भारतीय जनता पार्टी की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही है। पहले पार्टी के अपने उम्मींदवार अभिषेक उर्फ़ बंटी का टिकट बदलना पड़ा। इसके बाद अब नए उम्मींदवार नीरज कुमार सिन्हा केबायोडाटा को लेकर न्य विवाद सामने आ गया। ऐसे में चुनावी माहौल और भी गर्म हो गया है , जबकि विपक्ष के नेता बीजेपी पर लगातार सवाल उठा रहे हैं।
दरसअल, बीजेपी ने पहले अभिषेक उर्फ बंटी को अपना उम्मीदवार बनाया था। उन्होंने नामांकन भी दर्ज कर लिया था। लेकिन बाद में पारिवारिक कारणों का हवाला देते हुए अपना नाम नामांकन वापस ले लिया। इसके बाद में पार्टी ने नीरज कुमार सिन्हा को मैदान में उतारा। हालांकि उम्मीदवार बदलने का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था की उनके बायोडाटा को लेकर न्य विवाद सामने आ गया।
आखिर क्या है बायोडाटा वाला विवाद ?
बीजेपी की ओर से जारी नीरज कुमार सिन्हा को उम्मीदवार के तौर पर खड़ा किया गया। साथ ही उनका बायोडाटा भी मीडिया के सामने जारी किया। जिसके बाद बवाल मच गया। दरअसल दस्तावेज़ में नीरज कुमार सिन्हा की जन्मतिथि 1 जुलाई 1994 लिखी गई थी. एयर उसके बायोडाटा में निचे लिखा गया था की 2003 में बीजेपी के प्राथमिक सदस्य्ता लेकर अपने राजनितिक सफर की शुरुवात की थी।
इस डिटेल ने तुरंत सबका ध्यान खींच लिया। अगर हिसाब लगाया जाए तो नीरज कुमार का जन्म 1994 में हुआ। और उन्होंने साल 2006 में पार्टी ज्वाइन की , तो उस वक़्त उनकी उम्र महज 12 साल रही होगी। अब सवाल उठता है की महज 12 साल की उम्र में कोई बच्चा बीजेपी के प्राथमिक सदस्य कैसे बन सकता है ?

विवाद बढ़ा तो BJP ने जारी किया संशोधित बायोडाटा
नीरज कुमार सिन्हा के बायोडाटा को लेकर विवाद बढ़ने के बाद बीजेपी ने उनका संशोधित बायोडाटा जारी किया। नए दस्तावेज में जन्मतिथि 1 जुलाई 1994 ही रखी गई, लेकिन पहले बायोडाटा में दर्ज साल 2006 में बीजेपी जॉइन करने का उल्लेख हटा दिया गया। साथ ही, संशोधित बायोडाटा में यह भी नहीं बताया गया कि वह पार्टी से कब जुड़े। हालांकि, इस बदलाव को लेकर बीजेपी की ओर से कोई आधिकारिक सफाई नहीं दी गई।
यह विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब एक दिन पहले ही बीजेपी ने अपने घोषित उम्मीदवार अभिषेक उर्फ बंटी का टिकट बदलकर नीरज कुमार सिन्हा को मैदान में उतारा था। ऐसे में टिकट बदलने के तुरंत बाद बायोडाटा में बदलाव ने बांकीपुर उपचुनाव की सियासी हलचल और बढ़ा दी है।

पहले टिकट बदलने पर भी उठे थे सवाल
इससे पहले भी बीजेपी का उम्मीदवार बदलने का फैसला चर्चा में रहा था। अभिषेक उर्फ बंटी के नामांकन वापस लेने के बाद पार्टी को अंतिम समय में नया उम्मीदवार घोषित करना पड़ा। चुनाव के बीच उम्मीदवार बदलना किसी भी पार्टी के लिए आसान फैसला नहीं होता और इसका असर चुनावी रणनीति पर भी पड़ सकता है।
अब बायोडाटा विवाद सामने आने के बाद विपक्ष इसे बीजेपी की दूसरी बड़ी चूक बताकर लगातार हमला बोल रहा है।
बांकीपुर सीट क्यों बनी हुई है चर्चा का केंद्र?
बांकीपुर विधानसभा सीट इस बार बिहार की सबसे चर्चित सीटों में से एक है। राजधानी पटना का हिस्सा होने के कारण इस सीट का राजनीतिक महत्व काफी ज्यादा माना जाता है। इसके अलावा जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर के चुनावी मैदान में होने से मुकाबला पहले ही हाई-प्रोफाइल बन चुका है। ऐसे में बीजेपी से जुड़ा हर घटनाक्रम सुर्खियां बटोर रहा है।
चुनावी मुकाबले पर क्या पड़ेगा असर?
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि चुनाव के दौरान उठने वाले विवाद मतदाताओं के बीच चर्चा जरूर पैदा करते हैं। हालांकि, इनका वास्तविक असर मतदान के दिन ही पता चलता है। फिलहाल बीजेपी इस विवाद को टाइपिंग की गलती बताकर आगे बढ़ने की कोशिश कर रही है, जबकि विपक्ष इसे बड़ा चुनावी मुद्दा बनाने में जुटा है।
अब आगे क्या?
फिलहाल, बायोडाटा विवाद को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि यह मामला केवल आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित रहता है या फिर चुनाव आयोग के स्तर पर भी कोई कार्रवाई होती है। वहीं, बीजेपी की कोशिश होगी कि चुनाव प्रचार के दौरान यह विवाद उसके लिए बड़ा नुकसान न बने।
बांकीपुर की सियासत में पिछले कुछ दिनों के घटनाक्रम ने मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है। पहले उम्मीदवार बदलना और फिर नए उम्मीदवार के बायोडाटा पर उठे सवाल, दोनों ने इस सीट को बिहार की सबसे चर्चित चुनावी लड़ाइयों में शामिल कर दिया है।














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