जंतर मंतर पर चल रहे सीजेपी प्रोटेस्ट के बीच एक बड़ी खबर सामने आयी है। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। इसके बाद से राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। सीजेपी जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक मामले में धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफा के लिए प्रोटेस्ट कर रही थी।
देशभर में परीक्षा प्रणाली और NEET पेपर लीक को लेकर जारी छात्र आंदोलन के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उनका इस्तीफा ऐसे समय आया है, जब पिछले कई हफ्तों से शिक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार पर लगातार दबाव बढ़ रहा था।
इस्तीफे में क्या कहा?
धर्मेंद्र प्रधान ने अपने इस्तीफे में कहा कि “मेरे युवा साथियों, मैं पिछले 4 दशकों से अधिक समय से छात्र, शिक्षक और शिक्षा सुधार के लिए समर्पित रहा हूं। मेरा सदैव यह विश्वास रहा है कि एक सशक्त, समावेशी और दूरदर्शी शिक्षा व्यवस्था ही सशक्त राष्ट्र की आधारशिला होती है। मैं देश के युवाओं की आकांक्षाओं, भावनाओं और उनकी न्यायोचित अपेक्षाओं का गहरा सम्मान करता हूं। भारत की युवा पीढ़ी के सपनों को साकार करना हम सभी के राजनीतिक एवं सामाजिक जीवन का नैतिक संकल्प रहा है। आदरणीय प्रधानमंत्री जी के दूरदर्शी नेतृत्व में राष्ट्र की सेवा करने का जो अवसर मुझे प्राप्त हुआ उसके लिए मैं प्रधानमंत्री का आभार प्रकट करता हूं।”

धर्मेंद्र प्रधान ने कहा, “किंतु 3 मई 2026 को हुई NEET-UG की परीक्षा में सामने आई अनियमितता पाई गई। भारत सरकार ने इसको तुरंत संज्ञान में लेते हुए जांच सीबीआई को सौंपी और परीक्षा को रद्द किया एवं पुनः परीक्षा की तिथि घोषित की गई। इसके साथ ही अगले वर्ष से इस परीक्षा को सीबीटी (कंप्यूटर बेस्ट टेस्ट) मोड में करने का निर्णय लिया गया। इस दौरान हमारी प्रमुख प्राथमिकता यह रही कि 20 लाख से अधिक छात्रों की परीक्षा सुचारू रूप से आयोजित की जाए। इसके लिए सरकार के समग्र दृष्टिकोण के तहत काम किया गया। इसमें भारत सरकार के साथ राज्य सरकार, विशेषकर जिला प्रशासन की महत्वपूर्ण भूमिका रही। साथ ही, छात्रों, अभिभावकों और माता-पिता के सहयोग से 21 जून 2026 को यह परीक्षा पूर्ण हुई।”
उन्होंने शुरुआत से ही इस पूरे मामले की जिम्मेदारी से काम किया। उन्होंने लिखा कि यह मुद्दा किसी व्यक्ति का नहीं, बल्कि देश के करोड़ों छात्रों के भविष्य से जुड़ा है। उन्होंने यह भी कहा कि उनका इस्तीफा इस उद्देश्य से है ताकि इस विवाद का राजनीतिक दुरुपयोग न हो और छात्रों के हित सर्वोपरि बने रहें।
लंबे समय से हो रही थी इस्तीफे की मांग
NEET परीक्षा में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के आरोपों के बाद छात्र संगठनों और CJP (Cockroach Janata Party) ने देशभर में आंदोलन शुरू किया था। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में शिक्षा मंत्री का इस्तीफा भी शामिल था। पिछले कुछ दिनों में केंद्र सरकार और आंदोलनकारियों के बीच कई दौर की बातचीत हुई, लेकिन मंत्री के इस्तीफे को लेकर गतिरोध बना हुआ था।
आखिरकार सरकार ने लिया फैसला
शुक्रवार को केंद्र सरकार ने धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा स्वीकार कर लिया। इसके बाद देशभर में चल रहे आंदोलन के बीच इसे एक बड़े राजनीतिक फैसले के तौर पर देखा जा रहा है। आंदोलनकारी संगठनों का कहना है कि यह छात्रों के लोकतांत्रिक संघर्ष की पहली बड़ी सफलता है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि उनकी अन्य मांगों को लेकर आंदोलन अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।
CJP के संथापक अभिजीत दीपके की प्रतिक्रिया
CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने कहा कि इस सफलता का श्रेय पूरे देश के छात्रों और आंदोलन में शामिल लोगों को जाता है। उन्होंने लोगों से आंदोलन को किसी एक व्यक्ति की जीत न मानने की अपील की।
अब आगे क्या?
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी किसे सौंपी जाएगी और परीक्षा प्रणाली में सुधार को लेकर सरकार आगे क्या कदम उठाएगी। सरकार पहले ही पेपर लीक के मामलों में सख्त कानून, फास्ट ट्रैक सुनवाई और कड़ी सजा जैसे प्रस्तावों पर काम करने की बात कह चुकी है। अब नए शिक्षा मंत्री की नियुक्ति और इन सुधारों के क्रियान्वयन पर सभी की नजर रहेगी।
राजनीतिक और शैक्षणिक असर
धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मौजूदा सरकार के लिए एक महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम माना जा रहा है। विपक्ष इसे अपनी जीत बता रहा है, जबकि सरकार का कहना है कि यह फैसला छात्रों के हित और शिक्षा व्यवस्था में भरोसा कायम रखने के उद्देश्य से लिया गया है। आने वाले दिनों में संसद और देश की राजनीति में इस मुद्दे पर चर्चा जारी रहने की संभावना है।












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