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BRIC से BRICS तक: आखिर कैसे बना 11 देशों का बड़ा वैश्विक समूह?

भारत

2001 में सिर्फ एक आर्थिक विचार से शुरू हुई कहानी, आज 11 सदस्य और 10 पार्टनर देशों तक पहुंच चुकी है

भारत 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में 18वें BRICS शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने जा रहा है। आज BRICS दुनिया के सबसे चर्चित अंतरराष्ट्रीय समूहों में शामिल है, जिसमें ब्राज़ील, भारत, चीन, रूस समेत 11 सदस्य देश हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसकी शुरुआत सिर्फ चार देशों से हुई थी और उस समय BRICS नाम का कोई औपचारिक संगठन भी नहीं था? दरअसल, इस कहानी की शुरुआत साल 2001 में एक अर्थशास्त्री की रिपोर्ट से हुई थी। अर्थशास्त्री जिम ओ’नील ने ब्राजील, रूस, भारत और चीन को दुनिया की तेजी से उभरती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के तौर पर चिन्हित किया था। इन्हीं चार देशों के नाम से BRIC शब्द सामने आया—B यानी Brazil, R यानी Russia, I यानी India और C यानी China।

2006 में BRIC ने लिया औपचारिक रूप

रिपोर्ट के बाद BRIC शब्द धीरे-धीरे लोकप्रिय हुआ, लेकिन उस समय यह कोई औपचारिक अंतरराष्ट्रीय संगठन नहीं था। इसकी असली शुरुआत साल 2006 में हुई, जब न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान चारों देशों के विदेश मंत्रियों की पहली बैठक हुई। इसी के साथ BRIC एक औपचारिक सहयोग मंच के रूप में सामने आया। इसका मकसद आर्थिक और राजनीतिक सहयोग बढ़ाना और वैश्विक मंच पर उभरती अर्थव्यवस्थाओं तथा विकासशील देशों की आवाज को मजबूत करना था। इसके बाद साल 2009 में रूस के येकातेरिनबर्ग में पहला BRIC शिखर सम्मेलन आयोजित हुआ। इस बैठक के साथ चारों देशों के बीच सहयोग नेताओं के स्तर तक पहुंच गया।

दक्षिण अफ्रीका की एंट्री और BRIC बना BRICS

BRIC की कहानी में बड़ा बदलाव साल 2010 में आया, जब दक्षिण अफ्रीका को इस समूह में शामिल करने पर सहमति बनी। इसके बाद 2011 में चीन के सान्या में आयोजित तीसरे शिखर सम्मेलन में दक्षिण अफ्रीका ने पहली बार हिस्सा लिया। दक्षिण अफ्रीका के जुड़ने के साथ ही चार देशों का BRIC पांच देशों का BRICS बन गया। इसके बाद समूह का विस्तार लगातार जारी रहा। साल 2024 में मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात इसके सदस्य बने। वहीं 2025 में इंडोनेशिया के शामिल होने के बाद BRICS में कुल 11 सदस्य देश हो गए।

अब 11 सदस्य देशों के साथ 10 पार्टनर भी

फिलहाल BRICS में ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और इंडोनेशिया शामिल हैं। इसके अलावा BRICS के साथ 10 पार्टनर देश भी जुड़े हुए हैं। इनमें बेलारूस, बोलीविया, क्यूबा, कजाकिस्तान, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज्बेकिस्तान और वियतनाम शामिल हैं। इनमें से नौ देश जनवरी 2025 में पार्टनर बने थे, जबकि वियतनाम जून 2025 में इस समूह के पार्टनर के तौर पर शामिल हुआ।

सदस्य और पार्टनर देश में क्या फर्क है?

BRICS के पूर्ण सदस्य देशों को समूह की गतिविधियों और निर्णय प्रक्रिया में व्यापक भूमिका मिलती है। नए सदस्यों को शामिल करने जैसे अहम फैसलों में भी सदस्य देशों की भूमिका होती है। वहीं पार्टनर देश BRICS के साथ सहयोग के लिए जुड़े होते हैं। उन्हें शिखर सम्मेलनों और विदेश मंत्रियों की बैठकों में आमंत्रित किया जा सकता है और वे कुछ घोषणाओं व अंतिम दस्तावेजों का समर्थन भी कर सकते हैं, लेकिन पूर्ण सदस्य देशों की तरह निर्णय लेने की भूमिका उनके पास नहीं होती। यानी सदस्य और पार्टनर के बीच सबसे बड़ा अंतर निर्णय प्रक्रिया में भूमिका का है।

भारत की चौथी अध्यक्षता, इस बार क्या है खास?

भारत इससे पहले 2012, 2016 और 2021 में BRICS की अध्यक्षता कर चुका है। 2012 में नई दिल्ली में चौथा BRICS शिखर सम्मेलन हुआ था, जो भारत में आयोजित पहला BRICS सम्मेलन था। 2016 में गोवा में आठवां शिखर सम्मेलन आयोजित हुआ, जबकि 2021 में कोरोना महामारी के बीच 13वां शिखर सम्मेलन वर्चुअल तरीके से हुआ था। अब 2026 में भारत चौथी बार BRICS की अध्यक्षता कर रहा है। इस बार की थीम “Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability” यानी “लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण” रखी गई है। भारत की अध्यक्षता में देशभर के 25 से ज्यादा शहरों में 350 से अधिक बैठकें और उच्च-स्तरीय विचार-विमर्श आयोजित किए गए हैं। ऐसे में नई दिल्ली में होने वाला 18वां शिखर सम्मेलन सिर्फ एक बैठक नहीं, बल्कि BRICS के बदलते वैश्विक स्वरूप और बढ़ते प्रभाव की एक बड़ी तस्वीर पेश करेगा।

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