ताशकंद से शुरू होगा चार दिवसीय दौरा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को चार दिवसीय सेंट्रल एशिया दौरे के लिए रवाना हो गए हैं। 29 अगस्त से 1 सितंबर तक चलने वाले इस दौरे में पीएम मोदी उज्बेकिस्तान और किर्गिस्तान की यात्रा करेंगे। यात्रा की शुरुआत ताशकंद से होगी, जहां वह उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे।
भारत-उज्बेकिस्तान रिश्तों को मिलेगी नई रफ्तार
ताशकंद में दोनों नेताओं के बीच व्यापार, निवेश, रक्षा, ऊर्जा, डिजिटल कनेक्टिविटी और शिक्षा समेत कई अहम मुद्दों पर चर्चा होगी। दोनों देश अपने-अपने विकास लक्ष्यों ‘विकसित भारत 2047’ और ‘उज्बेकिस्तान-2030’ को आगे बढ़ाने के लिए सहयोग की संभावनाओं पर भी विचार करेंगे। पीएम मोदी इस दौरान शास्त्री मेमोरियल और ताशकंद स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ ओरिएंटल स्टडीज में महात्मा गांधी सेंटर का दौरा भी कर सकते हैं।
पीएम मोदी का उज्बेकिस्तान का चौथा दौरा
विदेश मंत्रालय के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी का यह उज्बेकिस्तान का चौथा दौरा है। इससे पहले वह 2015 में उज्बेकिस्तान और मध्य एशिया के अन्य देशों की यात्रा कर चुके हैं। इसके बाद 2016 और 2022 में वह एससीओ शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए उज्बेकिस्तान पहुंचे थे। इस यात्रा को भारत और उज्बेकिस्तान के बीच बढ़ती रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

बिश्केक में SCO समिट, दुनिया की नजरें भारत पर
उज्बेकिस्तान के बाद पीएम मोदी 31 अगस्त को किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक पहुंचेंगे, जहां वह SCO के 26वें शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। इस साल शंघाई सहयोग संगठन अपनी 25वीं वर्षगांठ मना रहा है। सम्मेलन की थीम ‘SCO के 25 साल: टिकाऊ शांति, विकास और समृद्धि की ओर साथ मिलकर’ रखी गई है। पीएम मोदी सम्मेलन की मुख्य बैठक में भारत का पक्ष रखेंगे।
द्विपक्षीय बैठकों से बनेगी नई रणनीति
SCO समिट के दौरान प्रधानमंत्री मोदी कई देशों के नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकें भी कर सकते हैं। भारत की प्राथमिकताओं में क्षेत्रीय शांति, विकास, कनेक्टिविटी और आर्थिक सहयोग अहम रहेंगे। ऐसे में पीएम मोदी का यह चार दिवसीय दौरा सिर्फ कूटनीतिक मुलाकातों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सेंट्रल एशिया में भारत की रणनीतिक और आर्थिक मौजूदगी को मजबूत करने का बड़ा कदम माना जा रहा है।













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