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भारत–EU ट्रेड डील: दो दशकों का इंतज़ार खत्म, व्यापार का नया अध्याय शुरू

EU Trade

इतिहास बना—20 साल बाद फाइनल हुई डील

करीब दो दशक तक चली बातचीत के बाद भारत और यूरोपियन यूनियन (EU) के बीच बहुप्रतीक्षित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) आखिरकार फाइनल हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा घोषित यह समझौता ऐसे समय पर सामने आया है, जब भारत और EU दोनों ही वैश्विक व्यापार में नए साझेदार और नए संतुलन तलाश रहे हैं। 27 देशों वाले EU ब्लॉक के साथ यह डील भारत के लिए सिर्फ व्यापार नहीं, बल्कि रणनीतिक साझेदारी का भी मजबूत संकेत मानी जा रही है।

टैरिफ कटौती से खुलेगा भारतीय बाजार

इस डील के तहत भारत ने अपने कई हाई-टैरिफ सेक्टर्स को खोलने पर सहमति जताई है। मशीनरी, केमिकल्स और फार्मास्यूटिकल्स जैसे सेक्टर्स में लगने वाले भारी टैक्स को बड़े पैमाने पर खत्म किया जाएगा। खासतौर पर केमिकल सेक्टर को सबसे ज्यादा फायदा मिलने की उम्मीद है, जिसका असर मैन्युफैक्चरिंग, फार्मा और कंज्यूमर गुड्स तक दिखेगा। मेडिकल, सर्जिकल और ऑप्टिकल उपकरणों पर टैरिफ हटने से हेल्थकेयर सेक्टर को भी बड़ी राहत मिलेगी।

सस्ती वाइन, ऑलिव ऑयल और यूरोपीय स्वाद

EU से आने वाली वाइन, बीयर और ऑलिव ऑयल जैसे प्रोडक्ट्स अब भारतीय बाजार में पहले से ज्यादा किफायती हो सकते हैं। शराब पर ऊंचे टैक्स को घटाकर 40–50 प्रतिशत करने का फैसला किया गया है, जबकि ऑलिव ऑयल और कई खाद्य तेलों पर इंपोर्ट ड्यूटी पूरी तरह खत्म होगी। इससे यूरोपीय पैकेज्ड फूड, जूस और रेडी-टू-ईट प्रोडक्ट्स भारतीय उपभोक्ताओं के लिए ज्यादा प्रतिस्पर्धी दामों पर उपलब्ध होंगे।

कार, एविएशन और सर्विस सेक्टर में बड़ा बदलाव

डील का सबसे चर्चित हिस्सा कारों पर टैरिफ कटौती है, जिसे चरणबद्ध तरीके से 10% तक लाया जाएगा—हालांकि सालाना 2.5 लाख कारों की सीमा तय होगी और इलेक्ट्रिक व्हीकल्स को फिलहाल छूट नहीं मिलेगी। वहीं, एयरक्राफ्ट और स्पेसक्राफ्ट से जुड़े लगभग सभी प्रोडक्ट्स पर टैरिफ हटाने से भारत के एविएशन और एयरोस्पेस प्लान्स को रफ्तार मिलेगी। इसके साथ ही EU को भारत में फाइनेंशियल और मैरीटाइम सर्विसेज में विशेष पहुंच दी जाएगी।

खेती सुरक्षित, क्लाइमेट पर फोकस

सरकार ने इस डील में संतुलन साधते हुए कृषि और डेयरी जैसे संवेदनशील सेक्टर्स को बाहर रखा है, ताकि किसानों और घरेलू उद्योगों पर असर न पड़े। बीफ, चिकन, चावल और चीनी जैसे उत्पादों पर भी टैरिफ में बड़ी राहत नहीं दी गई। खास बात यह है कि EU ने भारत को क्लाइमेट सपोर्ट के तहत करीब 500 मिलियन यूरो की मदद का वादा किया है, जो क्लीन एनर्जी, ग्रीन टेक्नोलॉजी और सस्टेनेबल मैन्युफैक्चरिंग में इस्तेमाल होगी। कुल मिलाकर, यह डील भारत–EU रिश्तों को व्यापार से आगे ले जाकर भविष्य की साझेदारी की मजबूत नींव रखती है।

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