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बांग्लादेश में राजनीतिक बदलाव के बाद भारत की रणनीतिक कूटनीतिक सक्रियता

India-Bangladesh

मोदी की बधाई और बदला हुआ राजनीतिक परिदृश्य

बांग्लादेश के आम चुनावों के बाद भारत की ओर से बधाई देने की परंपरा एक बार फिर निभाई गई, लेकिन इस बार हालात पूरी तरह बदले हुए थे। 13 फरवरी की सुबह प्रधानमंत्री Narendra Modi ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) को जीत की बढ़त पर बधाई दी। यह संदेश ऐसे समय आया जब लगातार चार चुनाव जीतने वाली Sheikh Hasina की अवामी लीग इस बार चुनावी मैदान में नहीं थी। मोदी का संदेश न सिर्फ औपचारिक शुभकामना था, बल्कि बदलते समीकरणों का संकेत भी माना गया।

दिल्ली का रणनीतिक यू-टर्न

विश्लेषकों के मुताबिक, बीएनपी को लेकर भारत का रुख पहले सतर्क रहा है, लेकिन मौजूदा हालात में एक मजबूत निर्वाचित सरकार को समर्थन देना नई दिल्ली की व्यावहारिक रणनीति है। बीएनपी के कार्यवाहक अध्यक्ष Tarique Rahman के नेतृत्व में पार्टी ने हाल के महीनों में भारत के प्रति नरम रुख दिखाया है। जानकारों का मानना है कि यह कूटनीतिक ‘यू-टर्न’ दरअसल स्थिरता और क्षेत्रीय संतुलन को प्राथमिकता देने की सोच से जुड़ा है।

पिछले रिश्तों की परछाई

बीजेपी और बीएनपी की वैचारिक समानताओं के बावजूद अतीत में दोनों के बीच खुला संवाद सीमित रहा। जब 2014 में मोदी के नेतृत्व में बीजेपी को पूर्ण बहुमत मिला, तब रहमान लंदन में निर्वासन में थे। उस दौर में अनौपचारिक ‘ट्रैक-टू’ कूटनीति के जरिए संपर्क बनाए रखने की कोशिशें हुईं, लेकिन सार्वजनिक स्तर पर रिश्तों में खास गर्मजोशी नहीं दिखी। अब बदले हालात में दोनों पक्ष पुराने मतभेदों को पीछे छोड़ आगे बढ़ने के संकेत दे रहे हैं।

अल्पसंख्यक मुद्दा और संतुलन की चुनौती

भारत ने पिछले डेढ़ साल में बांग्लादेश में हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों पर कथित हमलों को लेकर चिंता जताई है। भारतीय जनता पार्टी ने स्पष्ट किया है कि नई सरकार के साथ संबंध इन मुद्दों से अलग नहीं रह सकते। ऐसे में बीएनपी सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और भरोसा बहाल करना होगी। यही पहलू दोनों देशों के रिश्तों की दिशा तय कर सकता है।

नई शुरुआत की संभावनाएं

नई दिल्ली में माहौल फिलहाल सकारात्मक है और निर्वाचित सरकार की वापसी का स्वागत किया गया है। विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर बीएनपी ‘बांग्लादेश फर्स्ट’ नीति के साथ संतुलित विदेश नीति अपनाती है और भारत-विरोधी बयानबाजी से दूर रहती है, तो दोनों देशों के रिश्तों में नई ऊर्जा आ सकती है। दक्षिण एशिया की राजनीति में यह बदलाव आने वाले महीनों में कई नए समीकरण गढ़ सकता है।

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