Advertisement

‘यह हादसा नहीं, हत्या है!’ सत्य निकेतन घटना के बाद सड़कों पर उतरे DU छात्र, उठी हॉस्टल बनाने की मांग

Satya Niketan

जर्जर इमारत ने खोला सिस्टम की बदहाल व्यवस्था का सच

सत्य निकेतन में जर्जर इमारत ढहने की घटना के बाद दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रों का गुस्सा अब सड़कों पर दिखाई दे रहा है। साउथ कैंपस के अलग-अलग कॉलेजों से जुटे छात्रों ने प्रदर्शन करते हुए यूनिवर्सिटी प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। हाथों में तख्तियां और जुबां पर ‘यह हादसा नहीं, हत्या है’ जैसे नारे लिए छात्रों ने सवाल उठाया कि आखिर कब तक छात्रों की सुरक्षा को नजरअंदाज किया जाता रहेगा?

हॉस्टल की कमी बनी छात्रों की सबसे बड़ी मजबूरी

प्रदर्शन कर रहे छात्रों का कहना है कि दिल्ली विश्वविद्यालय में पढ़ने के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों से हजारों छात्र दिल्ली आते हैं, लेकिन उनके लिए पर्याप्त हॉस्टल उपलब्ध नहीं हैं। बताया जाता है कि DU के सिर्फ करीब 20 कॉलेजों में ही हॉस्टल की सुविधा है। ऐसे में बड़ी संख्या में छात्र निजी PG और किराए के मकानों में रहने को मजबूर हैं, जहां सुरक्षा मानकों को लेकर अक्सर सवाल उठते रहे हैं।

महंगे PG में रहने वाले छात्रों ने उठाई सुरक्षा की आवाज

छात्रों का आरोप है कि कैंपस के आसपास कई PG और किराए के मकान बेहद संकरी गलियों, जर्जर ढांचों और अव्यवस्थित बिजली व्यवस्था के बीच संचालित हो रहे हैं। उनका कहना है कि पढ़ाई और भविष्य बनाने के लिए दिल्ली आने वाले छात्रों को सुरक्षित आवास मिलना चाहिए, न कि ऐसी जगह रहने की मजबूरी जहां हर वक्त सुरक्षा को लेकर चिंता बनी रहे।

Satya Niketan

प्रदर्शनकारियों की चार बड़ी मांगें

छात्रों ने हादसे के जिम्मेदार मकान मालिकों और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। इसके साथ ही मृतकों के परिवारों को उचित मुआवजा देने, सत्य निकेतन और कैंपस के आसपास के सभी PG व किराए के मकानों का Structural Safety Audit कराने और बाहरी छात्रों के लिए नए हॉस्टल बनाने की मांग उठाई गई है। छात्रों का कहना है कि सुरक्षा को लेकर सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि जमीन पर ठोस कार्रवाई चाहिए।

क्या छात्रों की जिंदगी की यही कीमत है?

सत्य निकेतन की घटना ने छात्रों के बीच सुरक्षा और आवास को लेकर लंबे समय से चले आ रहे सवालों को फिर सामने ला दिया है। प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि जब परिवार अपने बच्चों को बेहतर भविष्य के लिए दिल्ली भेजते हैं, तो उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी भी व्यवस्था की होनी चाहिए। अब बड़ा सवाल यही है—क्या इस हादसे के बाद DU प्रशासन छात्रों की मांगों पर ठोस कदम उठाएगा, या कुछ दिनों बाद यह गुस्सा भी बाकी मुद्दों की तरह दबकर रह जाएगा?

Read More: https://gbn24.com/category/state/delhi/

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *