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गुरुग्राम में 11वीं की छात्रा मायरा भंडारी ने शुरू किया ‘हृदय रक्षक अभियान’, CPR ट्रेनिंग से लोगों की जान बचाने की अनोखी पहल

समुदाय में आपातकालीन तैयारी के लिए एक युवा चेंजमेकर का दृष्टिकोण ने मायरा भंडारी द्वारा 'हृदय रक्षक अभियान' शुरू किया

समुदाय में आपातकालीन तैयारी के लिए एक युवा चेंजमेकर का दृष्टिकोण ने मायरा भंडारी द्वारा ‘हृदय रक्षक अभियान’ शुरू किया

गुरुग्राम, 20 जुलाई 2026। आज के समय में अचानक हार्ट अटैक और सडन कार्डियक अरेस्ट के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। ऐसे में समय पर सही मदद मिल जाए तो कई लोगों की जान बचाई जा सकती है। इसी सोच के साथ गुरुग्राम की 11वीं कक्षा की छात्रा मायरा भंडारी ने ‘हृदय रक्षक अभियान’ की शुरुआत की है। इस पहल का उद्देश्य लोगों को मेडिकल इमरजेंसी के दौरान सही तरीके से प्रतिक्रिया देने के लिए तैयार करना और समाज में जीवन बचाने की संस्कृति को बढ़ावा देना है।

मायरा भंडारी हेरिटेज इंटरनेशनल एक्सपीरियेंशियल स्कूल, सीनियर कैंपस, सेक्टर-58 की छात्रा हैं। उन्होंने इस अभियान की शुरुआत युवाओं को समाज में सकारात्मक बदलाव का माध्यम बनाने की सोच के साथ की है।

पारस हेल्थ और RWA का मिला सहयोग

इस अभियान को पारस हेल्थ, गुरुग्राम के कार्डियोलॉजी विभाग के डायरेक्टर एवं यूनिट हेड डॉ. अमित भूषण शर्मा का मार्गदर्शन प्राप्त है। वहीं, निर्वाणा पैटियो क्लब आरडब्ल्यूए (RWA) ने भी इस पहल को अपना समर्थन दिया है। अभियान का उद्देश्य ऐसे प्रशिक्षित ‘फर्स्ट रिस्पॉन्डर्स’ तैयार करना है, जो किसी भी मेडिकल इमरजेंसी में शुरुआती मदद देकर किसी की जान बचा सकें।

बड़ो की सुरक्षा बच्चो के हाथ है अभियान का सन्देश

‘हृदय रक्षक अभियान’ का मुख्य संदेश है – बड़ों की सुरक्षा, बच्चों के हाथ। इस पहल के माध्यम से बच्चों और युवाओं को CPR (कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन), प्राथमिक उपचार और मेडिकल इमरजेंसी के दौरान सही कदम उठाने की ट्रेनिंग दी जाएगी, ताकि वे जरूरत पड़ने पर किसी की जान बचाने में मदद कर सकें।

क्यों जरूरी है CPR की जानकारी?

विशेषज्ञों के अनुसार, सडन कार्डियक अरेस्ट के बाद शुरुआती 3 से 5 मिनट सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। यदि इस दौरान मरीज को सही तरीके से CPR दिया जाए और समय रहते मेडिकल सहायता बुलाई जाए, तो उसकी जान बचने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। यही कारण है कि इस अभियान का फोकस लोगों को व्यावहारिक प्रशिक्षण देने पर रखा गया है।

स्कूलों और सोसाइटियों में लगेंगी ट्रेनिंग वर्कशॉप

अभियान के तहत गुरुग्राम की हाउसिंग सोसाइटियों, रिहायशी परिसरों और स्कूलों में नियमित प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यशालाओं में पारस हेल्थ के विशेषज्ञ लोगों को CPR देने की सही तकनीक, हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट के शुरुआती संकेतों की पहचान, बेसिक फर्स्ट एड और इमरजेंसी मेडिकल सेवाओं से तुरंत संपर्क करने की प्रक्रिया सिखाएंगे।

आयोजकों का कहना है कि उनका लक्ष्य हर परिवार में कम से कम एक ऐसा व्यक्ति तैयार करना है, जो किसी भी मेडिकल आपात स्थिति में घबराने के बजाय आत्मविश्वास के साथ सही निर्णय ले सके।

‘Be a Lifesaver’ के विजन के साथ आगे बढ़ेगा अभियान

“तैयार रहें, जिम्मेदार बनें” और “Be a Lifesaver” के संदेश के साथ यह अभियान लोगों को सिर्फ जागरूक ही नहीं करेगा, बल्कि उन्हें व्यावहारिक रूप से सक्षम भी बनाएगा। इसका उद्देश्य ऐसे हार्ट-सेफ समुदाय तैयार करना है, जहां हर नागरिक सार्वजनिक स्वास्थ्य सुरक्षा में अपनी जिम्मेदारी निभा सके।

एक दिन का कार्यक्रम नहीं, लंबी सोच का हिस्सा

मायरा भंडारी का मानना है कि यह सिर्फ एक जागरूकता अभियान नहीं, बल्कि एक दीर्घकालिक सामुदायिक स्वास्थ्य आंदोलन है। पारस हेल्थ के विशेषज्ञों से मिले अनुभव और मार्गदर्शन के बाद उन्होंने इस पहल की शुरुआत की, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों तक जीवन बचाने वाली ट्रेनिंग पहुंचाई जा सके।

एक भावी डॉक्टर बनने का सपना देखने वाली मायरा भविष्य में शहर के अलग-अलग इलाकों में ‘फर्स्ट रिस्पॉन्डर ट्रेनिंग कैंप’ आयोजित करना चाहती हैं। उनका उद्देश्य निवासियों, केयरगिवर्स और सपोर्ट स्टाफ को ऐसी जरूरी ट्रेनिंग देना है, जिससे वे आपात स्थिति में बिना घबराए सही कदम उठा सकें।

ग्रामीण क्षेत्रों तक भी पहुंचेगा अभियान

मायरा की योजना इस पहल को सिर्फ शहरों तक सीमित रखने की नहीं है। आने वाले समय में वह ग्रामीण क्षेत्रों और आंगनवाड़ियों में भी इस अभियान का विस्तार करना चाहती हैं। जहां मेडिकल सुविधाएं समय पर नहीं पहुंच पातीं, वहां स्थानीय युवाओं, फ्रंटलाइन वर्कर्स और आम लोगों को CPR, कार्डियक अरेस्ट की पहचान और बेसिक फर्स्ट एड की ट्रेनिंग देकर आपातकालीन परिस्थितियों के लिए तैयार किया जाएगा।

मायरा का मानना है कि किसी भी मेडिकल इमरजेंसी में अस्पताल पहुंचने से पहले आसपास मौजूद व्यक्ति की सही प्रतिक्रिया ही कई बार किसी की जिंदगी बचा सकती है। यही सोच ‘हृदय रक्षक अभियान’ को एक सामाजिक आंदोलन के रूप में आगे बढ़ाने की प्रेरणा देती है।

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