सत्ता परिवर्तन के बाद अस्थिर हालात
वेनेजुएला में सत्ता परिवर्तन के बाद हालात लगातार ज्यादा तनावपूर्ण होते जा रहे हैं। मादुरो की गिरफ्तारी के बाद सरकार के भीतर नेतृत्व को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है। आम जनता के बीच डर, अफवाहें और असुरक्षा का माहौल है। कई इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है और राजनीतिक गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी जा रही है। इस पूरे घटनाक्रम ने वेनेजुएला को एक बार फिर वैश्विक राजनीति के केंद्र में ला खड़ा किया है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय हालात पर बारीकी से नजर बनाए हुए है, क्योंकि सत्ता परिवर्तन के बाद किसी भी गलत कदम से हालात हिंसक रूप ले सकते हैं। राजनीतिक अस्थिरता के बीच देश में सत्ता संतुलन को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता बढ़ गई है।
डेल्सी रोड्रिगेज पर ट्रंप का सख्त रुख
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस संवेदनशील समय में वेनेजुएला की उपराष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज को लेकर बेहद सख्त और आक्रामक रुख अपनाया है। ट्रंप ने खुली चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर रोड्रिगेज अमेरिका की बात नहीं मानतीं, तो उन्हें मादुरो से भी बुरा अंजाम भुगतना पड़ सकता है। स तरह की भाषा अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में असामान्य मानी जाती है, क्योंकि इससे टकराव और बढ़ने का खतरा रहता है। यह बयान रोड्रिगेज पर मानसिक और राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश है, ताकि वे अमेरिका के पक्ष में फैसले लें।
The Atlantic को दिए इंटरव्यू में चेतावनी
ट्रंप ने अमेरिकी मैगजीन The Atlantic को दिए फोन इंटरव्यू में बेहद सख्त और धमकी भरे लहजे में कहा कि अगर रोड्रिगेज वह नहीं करतीं, जो अमेरिका वेनेजुएला के लिए सही मानता है, तो उन्हें “बहुत बड़ी कीमत” चुकानी पड़ेगी। ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा कि उनका अंजाम मादुरो से भी ज्यादा गंभीर हो सकता है। यह बयान सिर्फ चेतावनी नहीं, बल्कि राजनीतिक दबाव का सार्वजनिक प्रदर्शन है। इंटरव्यू के जरिए ट्रंप ने यह संदेश न सिर्फ वेनेजुएला सरकार को दिया, बल्कि पूरी दुनिया को दिखाया कि अमेरिका इस मुद्दे पर कितना आक्रामक है।
अनिश्चित भविष्य और बढ़ता वैश्विक तनाव
यह बयान ऐसे समय में आया है जब मादुरो की गिरफ्तारी के बाद वेनेजुएला में सत्ता को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। ट्रंप के इस बयान से दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। दोनों ही हालात में देश के लिए चुनौतियां कम नहीं होंगी। यह पूरा मामला अब सिर्फ दो देशों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि वैश्विक राजनीति का बड़ा मुद्दा बन चुका है। रूस, चीन और अन्य देश भी स्थिति पर नजर रखे हुए हैं।















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