राजपाल यादव को दिल्ली हाई कोर्ट से बड़ा झटका, चेक बाउंस केस में फिर जाना होगा जेल, 3 महीने की सजा बरकरार। बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। दिल्ली हाई कोर्ट ने चेक बाउंस मामले में उन्हें बड़ी राहत देने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए तीन महीने की सजा में कोई बदलाव नहीं किया। ऐसे में अब अभिनेता को दोबारा जेल जाना पड़ सकता है। हालांकि, उनके पास अभी सुप्रीम कोर्ट का रुख करने का कानूनी विकल्प मौजूद है।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला साल 2018 में रिलीज हुई फिल्म ‘अता पता लापता’ से जुड़ा है। आरोप है कि फिल्म के निर्माण के दौरान लिए गए कर्ज का भुगतान करने के लिए राजपाल यादव की ओर से एक चेक जारी किया गया था। लेकिन जब उस चेक को बैंक में लगाया गया, तो वह बाउंस हो गया। इसके बाद संबंधित पक्ष ने अदालत में शिकायत दर्ज कराई और मामला कोर्ट तक पहुंच गया।

ट्रायल कोर्ट ने सुनाई थी तीन महीने की सजा
मामले की सुनवाई के बाद ट्रायल कोर्ट ने राजपाल यादव को दोषी मानते हुए तीन महीने की जेल की सजा सुनाई थी। इसके साथ ही अदालत ने उन्हें तय राशि का भुगतान करने का भी आदेश दिया था। हालांकि, इस फैसले के खिलाफ उन्होंने दिल्ली हाई कोर्ट में अपील दायर की थी।
दिल्ली हाई कोर्ट से भी नहीं मिली राहत
अब दिल्ली हाई कोर्ट ने भी उनकी अपील पर सुनवाई करते हुए ट्रायल कोर्ट के फैसले में दखल देने से इनकार कर दिया है। कोर्ट का कहना है कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई ठोस आधार नहीं मिला, जिसके कारण निचली अदालत के फैसले को बदला जाए। यही वजह है कि तीन महीने की सजा बरकरार रखी गई है।
अब आगे क्या होगा?
हाई कोर्ट के फैसले के बाद राजपाल यादव के सामने अब सुप्रीम कोर्ट जाने का रास्ता खुला है। यदि वह वहां अपील करते हैं और राहत मिल जाती है, तो सजा पर रोक लग सकती है। वहीं, अगर सुप्रीम कोर्ट से भी राहत नहीं मिलती, तो उन्हें अदालत के आदेश का पालन करना होगा।
चेक बाउंस के मामलों में क्या कहता है कानून?
भारत में चेक बाउंस के मामलों की सुनवाई परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 138 के तहत की जाती है। अगर कोई व्यक्ति जानबूझकर ऐसा चेक जारी करता है, जो बैंक में भुगतान के समय बाउंस हो जाता है और तय समय के भीतर भुगतान नहीं करता, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकती है। ऐसे मामलों में अदालत जुर्माना, जेल या दोनों की सजा सुना सकती है।
इस फैसले का क्या मतलब है?
दिल्ली हाई कोर्ट के इस फैसले से साफ है कि आर्थिक मामलों में अदालतें कानून का सख्ती से पालन कर रही हैं। वहीं, राजपाल यादव के लिए यह फैसला बड़ा झटका माना जा रहा है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या वह सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे या फिर उन्हें तीन महीने की सजा काटनी पड़ेगी
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