नॉर्थ अटलांटिक में हाई-वोल्टेज ऑपरेशन
नॉर्थ अटलांटिक महासागर में अमेरिका ने एक बड़ी और साहसिक कार्रवाई को अंजाम दिया। अमेरिकी विशेष बलों और U.S. Coast Guard ने रूसी झंडे वाले ऑयल टैंकर ‘Marinera’ को जब्त कर लिया। यह जहाज़ पहले ‘Bella-1’ के नाम से जाना जाता था। करीब दो हफ्तों तक चले समुद्री पीछा अभियान के बाद आखिरकार अमेरिकी एजेंसियों ने इसे घेरकर अपने नियंत्रण में ले लिया।
नाम बदला, झंडा बदला… लेकिन बच नहीं पाया
बताया जा रहा है कि प्रतिबंधों से बचने के लिए टैंकर का नाम Bella-1 से बदलकर Marinera किया गया और इसे रूसी झंडे के तहत रजिस्टर कराया गया। लेकिन अमेरिकी एजेंसियां पहले से ही इस जहाज़ पर नज़र रखे हुए थीं। लगातार सैटेलाइट और समुद्री निगरानी के ज़रिए इसकी गतिविधियों को ट्रैक किया गया, जिससे यह रणनीति नाकाम साबित हुई।
प्रतिबंधित तेल की तस्करी का आरोप
अमेरिका का आरोप है कि यह टैंकर ईरान और वेनेजुएला से जुड़े नेटवर्क के लिए कच्चे तेल की तस्करी कर रहा था। इसी वजह से इस जहाज़ पर 2024 से अमेरिकी प्रतिबंध लागू थे। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि ऐसे “शैडो फ्लीट” जहाज़ अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को चकमा देकर अवैध तेल व्यापार को बढ़ावा देते हैं।
रूसी नौसैनिक गतिविधियों से बढ़ा तनाव
इस ऑपरेशन के दौरान हालात बेहद संवेदनशील हो गए, क्योंकि इलाके में रूसी नौसैनिक गतिविधियां भी देखी गईं। हालांकि किसी सीधे टकराव की खबर नहीं है, लेकिन इस घटनाक्रम ने समुद्र में शक्ति प्रदर्शन का माहौल बना दिया। यह घटना दिखाती है कि वैश्विक राजनीति अब खुले समुद्रों तक पहुंच चुकी है।
क्या और बढ़ेगा अमेरिका-रूस का टकराव ?
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कार्रवाई अमेरिका और रूस के बीच पहले से मौजूद भू-राजनीतिक तनाव को और गहरा कर सकती है। समुद्र में प्रतिबंधों को सख्ती से लागू करने के संकेत देने वाली यह कार्रवाई आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून, ऊर्जा राजनीति और वैश्विक शक्ति संतुलन पर बड़ा असर डाल सकती है।















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