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उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत को लेकर JNU में छात्र प्रदर्शन, केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाज़ी

JNU

जमानत न मिलने से नाराज़ छात्रों का विरोध

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में 5 जनवरी 2026 को छात्रों ने उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत न मिलने के मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन कर रहे छात्रों का कहना था कि लंबे समय से दोनों छात्र नेता न्यायिक हिरासत में हैं और उन्हें अब तक राहत नहीं मिल पाई है। JNU में हुए इस प्रदर्शन के बाद राजनीतिक गलियारों में भी हलचल तेज हो गई है।

JNU कैंपस में नारेबाज़ी और मार्च

इस फैसले के विरोध में छात्रों ने JNU कैंपस में मार्च निकाला। सबरमती हॉस्टल के पास हुए प्रदर्शन के दौरान कुछ छात्रों ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारे लगाए। इन नारों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह का नाम लेकर नारेबाज़ी की गई, जिससे माहौल और तनावपूर्ण हो गया।

सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो

प्रदर्शन के दौरान लगाए गए नारों का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। वीडियो सामने आने के बाद यह मुद्दा कैंपस से बाहर निकलकर राष्ट्रीय स्तर की बहस बन गया। समर्थकों ने इसे असहमति और अभिव्यक्ति की आज़ादी से जोड़ा, जबकि आलोचकों ने इसे भड़काऊ और आपत्तिजनक बताया।

JNU प्रशासन का सख्त रुख

वीडियो वायरल होने के बाद JNU प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया। विश्वविद्यालय ने कहा कि इस तरह के नारे कैंपस की शांति और सौहार्द के लिए खतरा हैं। प्रशासन ने दिल्ली पुलिस से FIR दर्ज करने की मांग की और कथित रूप से 9 छात्रों के नाम भी साझा किए हैं। कैंपस में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। प्रशासन की ओर से छात्रों से शांति बनाए रखने की अपील की गई।

अभिव्यक्ति की आज़ादी बनाम राष्ट्रीय सुरक्षा की बहस

इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर असहमति, अभिव्यक्ति की आज़ादी और राष्ट्रीय सुरक्षा के बीच संतुलन को लेकर बहस छेड़ दी है। जहां कुछ छात्र संगठनों का कहना है कि उनका विरोध शांतिपूर्ण और न्याय के समर्थन में था, वहीं राजनीतिक दलों और प्रशासन का तर्क है कि कानून और व्यवस्था बनाए रखना सर्वोपरि है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक और कानूनी प्रतिक्रियाएं और तेज़ हो सकती हैं।

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