सुप्रीम कोर्ट की सख्त एंट्री
उच्च शिक्षा से जुड़े एक अहम मसले पर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा कदम उठाया है। UGC के Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026 पर कोर्ट ने तत्काल रोक लगा दी है। कोर्ट ने साफ कहा कि जब तक इस मामले की पूरी जांच नहीं हो जाती, तब तक 2012 के पुराने नियम ही लागू रहेंगे। यह फैसला उस जनहित याचिका पर आया है, जिसमें नए नियम के सेक्शन 3(C) को चुनौती दी गई थी।
सेक्शन 3(C) पर क्यों उठा सवाल ?
नए इक्विटी रूल का सेक्शन 3(C) शुरू से ही विवादों में रहा है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि यह प्रावधान भेदभावपूर्ण और मनमाना है, जिससे कुछ वर्गों को उच्च शिक्षा से बाहर किए जाने का खतरा पैदा हो सकता है। याचिका में कहा गया कि इस सेक्शन में भेदभाव की जो परिभाषा दी गई है, वह न तो स्पष्ट है और न ही न्यायसंगत।
संविधान और UGC एक्ट से टकराव का आरोप
याचिका में यह भी दलील दी गई कि सेक्शन 3(C) संविधान के अनुच्छेदों—समानता का अधिकार, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और व्यक्तिगत स्वतंत्रता—का उल्लंघन करता है। इसके अलावा, इसे विश्वविद्यालय अनुदान आयोग अधिनियम, 1956 के भी खिलाफ बताया गया। याचिकाकर्ता के अनुसार, यह नियम उच्च शिक्षा में समान अवसर देने के मूल उद्देश्य को ही कमजोर करता है।
कोर्ट की टिप्पणी: प्रावधान है अस्पष्ट
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने इस प्रावधान को “अस्पष्ट” बताते हुए कड़ी टिप्पणी की। कोर्ट ने माना कि जब नियमों की भाषा ही साफ नहीं होगी, तो उसका गलत इस्तेमाल होने की आशंका बनी रहेगी। इसी आधार पर कोर्ट ने नए इक्विटी रूल पर रोक लगाते हुए पुराने नियमों को लागू रखने का निर्देश दिया।
आगे क्या होगा ?
याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ वकील विष्णु जैन ने तर्क दिया कि सेक्शन 3(C) संविधान की समानता की भावना के बिल्कुल विपरीत है। अब सुप्रीम कोर्ट इस प्रावधान की संवैधानिक वैधता की गहराई से जांच करेगा। तब तक के लिए UGC के नए इक्विटी रूल पर ब्रेक लग चुका है, और यह देखना दिलचस्प होगा कि आगे चलकर यह नियम बदलेगा या पूरी तरह खारिज होगा।















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