मेहनत पूरी, मजदूरी अधूरी
नोएडा में मजदूरों का आक्रोश अब खुलकर सामने आ गया है। 12-12 घंटे काम करने के बावजूद केवल 13 हजार रुपये मिलने से कर्मचारी नाराज़ हैं। प्रदर्शन कर रहे अवधेश मिश्रा जैसे श्रमिकों का कहना है कि इतने कम वेतन में घर चलाना नामुमकिन है। उनका कहना है कि जब काम पूरा लिया जा रहा है तो सैलरी भी उसी हिसाब से मिलनी चाहिए।
महंगाई ने बढ़ाई मुश्किलें
कर्मचारियों का कहना है कि महंगाई ने उनकी कमर तोड़ दी है। किराया, राशन और गैस के बढ़ते दामों के बीच 13 हजार रुपये में गुजारा करना बेहद मुश्किल हो गया है। गाजियाबाद से आईं सोनी बताती हैं कि सब्जियों के दाम 100 रुपये से नीचे नहीं मिलते, ऐसे में बचत तो दूर, दो वक्त का खाना जुटाना भी चुनौती बन गया है।
प्रदर्शन में बवाल, पुलिस सख्त
प्रदर्शन के दौरान हिंसा और आगजनी की घटनाओं ने हालात और तनावपूर्ण बना दिए हैं। पुलिस के मुताबिक, 300 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया गया है और कई एफआईआर दर्ज की गई हैं। पुलिस आयुक्त Lakshmi Singh ने कहा कि हिंसा फैलाने वालों की पहचान कर सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही सोशल मीडिया पर फैलाए गए भ्रामक संदेशों की भी जांच जारी है।
सरकार का फैसला, लेकिन असंतोष जारी
उत्तर प्रदेश सरकार ने न्यूनतम मजदूरी में अंतरिम बढ़ोतरी की घोषणा की है, जो 1 अप्रैल 2026 से लागू होगी। हालांकि 20,000 रुपये न्यूनतम वेतन की खबरों को सरकार ने पूरी तरह झूठा बताया है। वेज बोर्ड के जरिए स्थायी समाधान की बात कही जा रही है, लेकिन मजदूरों का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होंगी, उनका प्रदर्शन जारी रहेगा।

















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